उ०प्र० ब्याज माफी योजना-2026 लागू: वैट, सीएसटी व व्यापार कर के पुराने बकायों पर 100% तक ब्याज एवं अर्थदण्ड माफ
मेटा विवरण: उ०प्र० ब्याज माफी योजना-2026: वैट, सीएसटी, व्यापार कर व प्रवेश कर के 31.12.2025 तक के बकायों पर 100% तक ब्याज-अर्थदण्ड माफी। स्लैब, शर्तें व प्रक्रिया जानें।
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परिचय
उत्तर प्रदेश शासन ने शासनादेश संख्या I/1497681/2026, दिनांक 16 अक्टूबर 2026 द्वारा "ब्याज माफी योजना-2026" लागू की है। यह शासनादेश विशेष सचिव, उ०प्र० शासन, राज्य कर अनुभाग-3 द्वारा आयुक्त, राज्य कर, उ०प्र० को जारी किया गया है।
इस योजना में दिनांक 31.12.2025 तक पारित आदेशों से सृजित मांग पर लम्बित ब्याज माफ किया जाएगा। साथ ही बकाया जमा न करने के कारण लगाया गया अर्थदण्ड भी माफ होगा।
वैट और व्यापार कर काल के पुराने कर निर्धारण आदेश, वसूली प्रमाण पत्र (RC) तथा वर्षों से लम्बित अपीलें आज भी अनेक व्यापारियों पर भारी बोझ हैं। यह योजना उनके लिए सीमित अवधि का महत्वपूर्ण अवसर है।
किन अधिनियमों के बकाये सम्मिलित हैं?
- उ०प्र० बिक्री कर अधिनियम-1948
- केन्द्रीय बिक्री कर अधिनियम-1956
- उ०प्र० व्यापार कर अधिनियम-1995
- उ०प्र० मूल्य संवर्धित कर अधिनियम-2008
- उ०प्र० प्रवेश कर अधिनियम-2007
- उ०प्र० आमोद एवं पणकर अधिनियम-1979 (मनोरंजन कर नियमावली सहित)
- उ०प्र० केबिल टेलीविजन नेटवर्क नियमावली-1997
ध्यान दें: जीएसटी के बकाये इस योजना में सम्मिलित नहीं हैं।
राहत की स्लैबवार दरें
प्रत्येक स्थिति में मूल बकाया (Principal) की सम्पूर्ण धनराशि जमा करनी होगी।
| मूल बकाया धनराशि | जमा किया जाने वाला ब्याज | माफ ब्याज | अर्थदण्ड माफी* |
|---|---|---|---|
| रु० 10 लाख तक | शून्य | 100% | 100% |
| रु० 10 लाख से रु० 1 करोड़ तक | 10% | 90% | 100% |
| रु० 1 करोड़ से रु० 5 करोड़ तक | 25% | 75% | 100% |
| रु० 5 करोड़ से अधिक | 50% | 50% | 100% |
*केवल बकाया जमा न करने पर आरोपित अर्थदण्ड।
योजना की प्रमुख विशेषताएँ
- अवधि: योजना शासनादेश जारी होने की तिथि से तीन माह तक प्रभावी है। आवश्यकता होने पर मा० मुख्यमंत्री जी के अनुमोदन से अवधि बढ़ाई जा सकती है।
- क्षेत्र: योजना प्रदेश के समस्त जनपदों में एक साथ लागू है।
- आदेशवार लाभ: प्रत्येक आदेश से सृजित मांग पृथक-पृथक मानी जाएगी।
- व्यापक दायरा:
- स्वीकृत कर एवं आरोपित कर, दोनों की मांग सम्मिलित है।
- माननीय न्यायालयों से तय (Decided) अथवा लम्बित विवादों की मांग भी सम्मिलित है।
- पूर्व समाधान योजनाओं की अवशेष समाधान राशि पर भी योजना लागू है।
- पूर्व जमा धनराशि: जिन बकायेदारों ने पहले ही मूल बकाया की पूर्ण या आंशिक धनराशि जमा कर दी है, वे भी लाभ ले सकेंगे।
- गणना की तिथि: ब्याज/अर्थदण्ड की गणना आवेदन की तिथि तक की जाएगी।
आवेदन प्रक्रिया
- मूल बकाया, ब्याज एवं अर्थदण्ड की गणना आवेदन की तिथि तक करें।
- आगणित धनराशि पहले ऑनलाइन जमा करें।
- इसके पश्चात comtax.up.nic.in पर ऑनलाइन आवेदन करें।
- सम्बन्धित कर निर्धारण अधिकारी (संयुक्त आयुक्त कार्पोरेट/उपायुक्त/सहायक आयुक्त/राज्य कर अधिकारी) विलम्बतम 15 दिन में गणना का सत्यापन करेंगे।
- आवेदन सही पाए जाने पर 15 दिन के भीतर “RC बेबाक होने का प्रमाण पत्र” जारी किया जाएगा।
- त्रुटि मिलने पर पोर्टल पर नोटिस जारी होगा। व्यापारी निर्धारित समय में त्रुटि का निराकरण कर पोर्टल पर अपलोड करेगा। सही धनराशि जमा करने की तिथि से 15 दिन में प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
- योजना की अंतिम तिथि तक प्राप्त सभी आवेदनों पर कार्यवाही योजना समाप्ति के अगले 15 दिन में पूर्ण की जाएगी।
न्यायालय में लम्बित मामलों हेतु शर्त
जिन व्यापारियों के मामले किसी माननीय न्यायालय में लम्बित हैं, उन्हें योजना का लाभ लेने के लिए दो कार्य करने होंगे:
- सम्बन्धित न्यायालय में Not Press Application दाखिल कर उसका प्रमाण प्रस्तुत करना, तथा
- वाद वापस लेने के सम्बन्ध में शपथ-पत्र देना।
अन्य महत्वपूर्ण बिंदु
- अन्य प्रकार के अर्थदण्ड, जो बकाया जमा न करने के कारण नहीं लगाए गए हैं, माफ नहीं होंगे।
- योजना लागू होने के पूर्व या बाद में देय राशि से अधिक जमा की गई धनराशि वापस या समायोजित नहीं होगी।
- प्रत्येक जोन स्तर पर हेल्प डेस्क स्थापित होगी, जिस पर अधिकारियों की नामवार रोस्टर से ड्यूटी लगाई जाएगी।
- व्यापारियों की सुविधा हेतु टोल-फ्री नम्बर जारी किया जाएगा।
व्यावसायिक सावधानियाँ
- स्लैब का निर्धारण: योजना प्रत्येक आदेश के लिए पृथक लागू है। अतः स्लैब संभवतः आदेशवार मूल बकाया पर लागू होगा, कुल बकाया पर नहीं। आयुक्त के क्रियान्वयन परिपत्र या पोर्टल से इसकी पुष्टि करें।
- वाद वापसी अपरिवर्तनीय है: Not Press Application और शपथ-पत्र के बाद मूल कर पर विवाद का अधिकार समाप्त हो जाता है। जहाँ अपील मजबूत है, वहाँ दोनों विकल्पों की तुलना करें:
- अभी मूल कर जमा करके ब्याज माफी का लाभ लेना, तथा
- वाद का संभावित परिणाम और हारने की स्थिति में ब्याज का भार।
- सटीक गणना: अतिरिक्त जमा राशि वापस या समायोजित नहीं होगी। ब्याज आवेदन की तिथि तक लगेगा, इसलिए धनराशि जमा करना और आवेदन करना एक ही दिन, या न्यूनतम अंतराल में, करें।
- पूर्व में जमा ब्याज वापस नहीं होगा: जिन मामलों में ब्याज पहले ही जमा हो चुका है, उसकी वापसी इस योजना में संभव नहीं है।
- अर्थदण्ड की प्रकृति जाँचें: माफी केवल बकाया जमा न करने पर लगे अर्थदण्ड की है। अन्य चूकों पर लगे अर्थदण्ड (जैसे वैट अधिनियम की धारा 54 के अंतर्गत) देय रहेंगे।
- अभिलेखों का मिलान: विभागीय लेजर, RC रिकॉर्ड, मांग पत्र और चालानों का पहले मिलान करें। विसंगति ही त्रुटि-नोटिस का सबसे सामान्य कारण होती है।
- सभी मंचों की जाँच: ट्रिब्यूनल या उच्च न्यायालय में लम्बित अपीलें, स्थगन आदेश और कुर्की सहित वसूली कार्यवाहियाँ जाँचें। प्रत्येक मंच पर वाद वापसी की कार्यवाही सुनिश्चित करें।
- समाधान योजना की अवशेष राशि: पूर्व समाधान योजनाओं के अंतर्गत अवशेष राशि की स्थिति जाँचें। यह भी देखें कि कहीं पूर्व समाधान निरस्त होकर मांग पुनर्जीवित तो नहीं हो गई है।
- दस्तावेज सुरक्षित रखें: चालान, आवेदन पावती, Not Press Application का प्रमाण, शपथ-पत्र और विशेष रूप से “RC बेबाक प्रमाण पत्र” सुरक्षित रखें। यह प्रमाण पत्र मांग समाप्ति का एकमात्र साक्ष्य है।
- समय-सीमाएँ दर्ज करें:
- योजना की अंतिम तिथि (16.10.2026 से गणना करने पर लगभग मध्य जनवरी 2027)
- त्रुटि निराकरण की 15 दिन की अवधि
- योजना समाप्ति के बाद निस्तारण की 15 दिन की अवधि
- ग्राहक की लिखित सहमति: किसी भी वाद की वापसी से पूर्व ग्राहक से लिखित निर्देश अवश्य प्राप्त करें।
निष्कर्ष
अनेक पुराने मामलों में वर्षों का ब्याज मूल कर से भी अधिक हो चुका है। ऐसे बकायों के लिए ब्याज माफी योजना-2026 बड़ी आर्थिक राहत और स्थायी निस्तारण का अवसर है। व्यापारियों को अपने सभी लम्बित आदेशों की पहचान कर आदेशवार गणना करनी चाहिए। लम्बित वादों के गुण-दोष का आकलन करके योजना अवधि के भीतर समय रहते निर्णय लेना चाहिए।
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अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख शासनादेश दिनांक 16.10.2026 पर आधारित है और केवल सामान्य जानकारी हेतु है। कोई भी कार्यवाही करने से पूर्व मूल शासनादेश, विभागीय निर्देशों तथा किसी योग्य पेशेवर से परामर्श अवश्य लें।
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